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नाटक ने बताई एक रंगकर्मी के जीवन की व्यथा

Posted on March 9, 2021March 9, 2021 by अविनाश सैनी (संपादक)

संडे थियेटर की आठवीं प्रस्तुति

सप्तक रंगमंडल और पठानिया वर्ल्ड केंपस स्कूल द्वारा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, रोहतक के सहयोग से आयोजित संडे थियेटर में इस बार 7 मार्च को फरीदाबाद से आए बृज भारद्वाज द्वारा निर्देशित नाटक “कहानी रंगकर्मी की” का मंचन किया गया। बृज नाट्य मंडली द्वारा प्रस्तुत इस नाटक के लेखक मनीष जोशी ‘बिस्मिल’ हैं। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित मनीष ‘थियेटर ऑन बाइक्स’ अभियान के अगुवा रहे हैं, जिसके तहत कलाकर मोटरसाइकिल पर नाटक का सामान लाद कर विभिन्न गांवों व शहरों में नाट्य मंचन करते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, रोहतक (आईएमए) के संरक्षक डॉ. आरके चौधरी नाट्य संध्या के मुख्य अतिथि रहे। शिक्षाविद, संस्कृतिकर्मी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमणीक मोहन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

“कहानी रंगकर्मी की” नाटक में एक रंगकर्मी के जीवन की कटु सच्चाई को सामने लाने का सफल प्रयास किया गया। सभागार में उपस्थित हर कलाकार को ऐसा लग रहा था, मानो उसी के जीवन की व्यथा को मंच पर दिखाया जा रहा हो। असल में, रंगकर्म को समाज में अभी तक पूरी तरह से मान्यता नहीं मिली है। किसी से कहो कि हमारा बेटा या बेटी नाटक करते हैं, तो उनका पहला सवाल यही होता है कि नाटक तो करता है, पर वैसे क्या करता है! इस सवाल का जवाब आज तक कोई रंगकर्मी नहीं दे सका। नाटक में दिखाया गया कि आज के माहौल में नाटक करना एक अपराध सा बन गया है। हर कोई यह सोचता है कि नाटक करके उसे क्या मिलेगा! अगर कोई इंजीनियर, डॉक्टर, अधिकारी या प्रोफेसर बनता है तो इतना सक्षम हो जाता है कि अपने परिवार को पाल सके, लेकिन रंगकर्म करके परिवार को चलाना आज भी बहुत मुश्किल है।

बता दें कि इससे पहले एक रंगकर्मी की जिंदगी को इतनी अच्छी तरह से शायद ही किसी नाटक ने दिखाया हो। उसके जीवन की त्रासदी, उसके पारिवारिक मापदंड, उसके मां-बाप की अपेक्षाएं, उसके बहन-भाइयों के सपने, सब उसके रंगकर्म के आड़े आते हैं। नाटक में एक पात्र का यह कहना किसी रंगकर्मी की जिंदगी की वास्तविक सच्चाई को उजागर करने के लिए काफी है कि “नाटक मेरे लिए सांस लेने के समान है। मैं नाटक करता हूं तो जीता हूं, नहीं करूंगा तो मर जाऊंगा”। नाटक का निर्देशन बहुत ही मंजा हुआ था। पात्रों में बृज ने मुख्य भूमिका निभाई। उनके अलावा मनोज भारद्वाज, शत्रुधन, मोनिका, प्रीति और नवीन ने भी कमाल का अभिनय किया।

इस अवसर पर डॉ. चौधरी ने नाटकों के माध्यम से समाज को दिशा देने के काम में लगे रहने के लिए नाट्यकर्मियों को बहुत-बहुत बधाई दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का ऑडिटोरियम कलाकारों के लिए हमेशा उपलब्ध करवाने की कोशिश की जाएगी। कलाकारों की मांग को मानते हुए उन्होंने 27 मार्च, विश्व नाटक दिवस, के उपलक्ष्य में नाट्य उत्सव के आयोजन के लिए भी हाल उपलब्ध कराने का वादा किया। डॉ. रमणीक मोहन ने कलाकारों का हौसला बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासन से मांग की, कि पं. श्रीराम रंगशाला, जो शहर में कलाकारों का एकमात्र स्थान है, वह उन्हें निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाए।

सबसे बड़ी बात यह रही कि इस दिन कवि, संस्कृतिकर्मी एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में युवा कल्याण विभाग के निदेशक जगबीर राठी की पत्नी का जन्मदिन भी था, लेकिन उन्होंने इस मुबारक दिन को अपने घर या किसी होटल में न मनाकर कलाकारों के बीच मनाना मुनासिब समझा। रंगमंच पर ही केक मंगवाया गया और सभी कलाकारों और दर्शकों ने उनकी पत्नी को शुभकामनाएं देते हुए इस अनूठे आयोजन का भरपूर आनंद लिया। इस मौके पर श्रीमती राठी ने कलाकारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा जन्मदिन न तो आज तक कभी मनाया है और न ही कभी मना पाएंगी।

उपस्थित दर्शकों में हरियाणवीं फिल्मों के मशहूर हास्य अभिनेता रहे वरिष्ठ रंगकर्मी जनार्दन शर्मा, रिटायर्ड प्रिंसिपल बलजीत सिंह, रिटायर्ड प्रिंसिपल नकवी जी, प्रिंसिपल परम भूषण, डॉ. संजय जिंदल सहित रंगकर्मी कृष्ण नाटक, अलकेश दलाल, सुरेंद्र शर्मा, सुजाता, अविनाश सैनी, विकास रोहिल्ला, शक्ति सरोवर त्रिखा, रिंकी बत्रा, गुलाब सिंह, नेहा नरेश गाबा, मनोज, सुभाष नगाड़ा और विश्व दीपक आदि ने बढ़-चढ़कर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। सप्तक के सचिव अविनाश सैनी ने बताया कि अगले रविवार नाट्य संध्या में रेवाड़ी के मदन डागर द्वारा निर्देशित नाटक ‘साइकिल का दाह संस्कार’ का मंचन किया जाएगा। प्रवेश सभी के लिए निशुल्क रहेगा।

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