– चोट के बावजूद लड़े सतीश कुमार, वर्ल्ड चैंपियन से हारे
– पीवी सिंधू ने जीता कांस्य पदक, भारत के पदकों की संख्या बढ़ी
– इंग्लैंड को हराकर भारतीय हॉकी टीम अंतिम 4 में पहुंची
– गोल्फर अनिर्बान लाहिड़ी का सफर समाप्त
सारी दुनिया, 1 अगस्त। भारत ने टोक्यो ओलिंपिक के 9वें दिन, रविवार को 6 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और एक कांस्य पदक अपने खाते में जोड़ा। इसके अलावा भारत की पुरुष हॉकी टीम ने सेमीफाइनल में प्रवेश करके 40 साल बाद हॉकी में पदक जीतने की उम्मीदें जगा दीं। भारत ने अंतिम बार 1980 मास्को ओलंपिक खेलों में gold medal जीता था। रविवार की शुरुआत गोल्फ और घुड़सवारी से हुई। इसके बाद ओलिंपिक में सुपर हैवीवेट कैटेगरी में बॉक्सर सतीश कुमार क्वॉर्टर फाइनल मुकाबला खेलने के लिए रिंग में उतरे। 7 टांके लगने के बावजूद सतीश ने हिम्मत नहीं हारी और वर्ल्ड नंबर वन उज्बेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव का डटकर सामना किया। हालांकि सतीश का विजय अभियान अंतिम-8 के मुकाबले में रूक गया। बावजूद इसके लोग सतीश के जज्बे को सलाम कर रहे हैं।
सिंधु ने जीता कांस्य पदक

पीवी सिंधु ने टोक्यो ओलंपिक में भारत की झोली में एक और पदक डाल कर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने चीन की बिंगजियाओ को सीधे गेम में 21-13, 21-15 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा किया है। इसके साथ ही वे ओलंपिक के व्यक्तिगत इवेंट में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी हैं। पुरुषों में पहलवान सुशील कुमार ने बीजिंग 2008 में कांस्य और लंदन 2012 में रजत पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल की थी।
यह ओलंपिक खेलों में भारत का बैडमिंटन में ओवरऑल तीसरा पदक है। अब से पहले साइना नेहवाल ने लंदन ओलंपिक (2012) में कांस्य पदक और सिंधु ने रियो डी जेनेरियो (2016) में रजत पदक जीता था। सिंधु के पदक के साथ ही भारत के इस ओलंपिक में एक रजत और एक कांस्य सहित दो पदक को चुके हैं, जबकि कम से कम एक कांस्य पक्का हो चुका है। मुक्केबाज़ी में लवलीना बोरगोहेन ने यह पदक पक्का किया है, जिसे वे सिल्वर या गोल्ड में भी बदल सकती हैं।
हॉकी टीम ने रचा इतिहास, 4 दशक बाद पहुंची सेमीफाइनल में

क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को 3-1 से हरा कर भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रचा दिया है। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया 4 दशक बाद ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची है। भारत की ओर से अंतिम गोल हार्दिक सिंह ने 57वें मिनट में किया। खेल के अंतिम क्षणों में भारत के कप्तान मनप्रीत सिंह को येलो कार्ड भी दिखाया गया है, जिसकी वजह से उन्हें 5 मिनट तक बाहर बैठना पड़ा और टीम इंडिया को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने हौसला नहीं खोया और हार्दिक ने जबदस्त मैदानी गोल करके स्कोर 3-1 कर दिया।
आज भारतीय टीम शुरू से ही ग्रेट ब्रिटेन पर हावी रही। भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक हॉकी खेली और बेहतरीन बचाव किए। तीसरे क्वार्टर के लगभग अन्त तक भारत दिलप्रीत सिंह और गुरजंत सिंह के गोल की बदौलत 2-0 से आगे था। ये दोनों गोल 7वें और 16वें मिनट में हुए। इसके बाद तीसरे क्वार्टर के अंत में, यानी 45वें मिनट में ब्रिटेन ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए गोल किया। Samuel Ian का यह गोल ब्रिटेन का पहला और आखिरी गोल रहा। इस मैच में भारत ने तीनों मैदानी गोल किए। इसके अलावा गोलकीपर पी श्रीजेश व रक्षा पंक्ति के अन्य खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड के कई आक्रमणों को बेकार किया।
बता दें कि भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और बेल्जियम की टीमें पुरुष हॉकी के सेमीफाइनल में पहुंची हैं। सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला 3 अगस्त को बेल्जियम से होगा।
चोट के बाबजूद लड़े सतीश

रविवार की सुबह सुपर हैवीवेट बॉक्सिंग (91+ किग्रा) में सतीश कुमार का क्वार्टर फाइनल मुकाबला था। देशवासियों की नजरें चोटिल बॉक्सर सतीश कुमार पर लगी थी। सतीश के रिंग में उतरने पर आशंका थी, क्योंकि पिछले मुकाबले में लगी चोटों के कारण उनके माथे और ठोड़ी पर 7 टांके लगे थे। जमैका के रिकॉर्डो ब्राउन के खिलाफ हुए प्री क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में उन्हें दो गहरे कट लगे थे। लेकिन भारतीय सेना के जवान सतीश ने चोट की परवाह किए बिना रिंग में उतरने का फैसला किया, ताकि देश के लिए पदक जीत सकें। सतीश के सामने वर्ल्ड नंबर वन उज्बेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव की चुनौती थी। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी का डटकर सामना किया, लेकिन मुकाबले के दौरान उनके टांके खुल गए और उनसे खून रिसने लगा। इसके बाद भी उन्होंने fight जारी रखी। सेना के 32 वर्षीय मुक्केबाज ने अपने दाहिने हाथ से पंच भी जड़े परन्तु जलोलोव से पार नहीं पा सके। उन्हें 5-0 से हार का सामना करना पड़ा। सतीश हारे जरूर, लेकिन उन्होंने अपने जज्बे से सबका दिल जीत लिया। फुटबॉलर से मुक्केबाज बने जालोलोव ने भी अपना पहला ओलिंपिक पदक सुनिश्चित करने के बाद उनकी बहादुरी की तारीफ की। मैच के बाद जब सतीश से जख्मी हालत में खेलने के फैसले बाबत पूछा गया, तो उन्होंने कहा – “खिलाड़ी से पहले मैं एक सैनिक हूं, मैदान कैसे छोड़ देता।”

बता दें कि सतीश सुपर हैवीवेट में क्वालीफाई करने वाले भारत के पहले मुक्केबाज थे। उनकी हार के साथ ही पुरुष मुक्केबाजी में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई है।
भारतीय घुड़सवार फवाद मिर्जा क्रॉस कंट्री दौर के बाद 22वें स्थान पर

ओलिंपिक में दो दशक से अधिक समय बाद घुड़सवारी की स्पर्धा में उतरे एकमात्र भारतीय फवाद मिर्जा क्रॉस कंट्री स्पर्धा के बाद 11.20 पेनल्टी अंक के साथ 22वें स्थान पर रहे। सोमवार को व्यक्तिगत शो जंपिंग क्वालीफायर में अच्छा प्रदर्शन करने पर वह और उनका घोड़ा सिगनोर मेडिकॉट शीर्ष 25 में रह सकते हैं। इससे वे शाम को होने वाली इवेंटिंग जंपिंग के व्यक्तिगत वर्ग के फाइनल में जगह बना लेंगे।
मिर्जा के कुल 39.20 पेनल्टी अंक हैं। उन्होंने सिर्फ आठ मिनट में कंट्री रन पूरी की। घुड़दौड़ क्रॉसकंट्री व्यक्तिगत वर्ग में एक प्रतियोगी को सात मिनट 45 सेकंड के भीतर कोर्स का पूरा चक्कर लगाना होता है ताकि टाइम पेनल्टी कम रहे। पेनल्टी जितनी कम होती है, अश्वारोही अंकतालिका में उतना ही ऊपर स्थान हासिल करता है।
मिर्जा और सिगनोर ने तकनीकी दिक्कत के कारण देर से शुरू किया जिसकी वजह से उन्हें 11.20 पेनल्टी अंक मिल गए। ड्रेसेज दौर में वह शानदार प्रदर्शन के बाद नौवें स्थान पर थे। उसमें उन्हें 28 पेनल्टी अंक मिले। अब उन्हें शो जंपिंग में उतरना है जिसमें शीर्ष 25 में रहने पर वह इवेंटिंग जंपिंग केफाइनल में जगह बना लेंगे। ब्रिटेन के ओलिवर टाउनएंड शीर्ष पर हैं जिनके कुल 23.60 पेनल्टी अंक हैं। ब्रिटेन की लौरा कोलेट दूसरे और जर्मनी की जूलिया क्राजेवस्की तीसरे स्थान पर हैं।
अनिर्बान लाहिड़ी का सफर समाप्त
भारतीय गोल्फर अनिर्बान लाहिड़ी का ओलंपिक सफर भी खत्म हो गया। लाहिड़ी ने Tokyo Olympics में चार अंडर 67 के शानदार प्रदर्शन से शुरुआत की थी, लेकिन आखिर में उन्हें 42वें स्थान से संतोष करना पड़ा। यह उनका दूसरा ओलंपिक था। भारत के दूसरे गोल्फर उदयन माने 60 गोल्फरों में 56वें स्थान पर रहे।
मैच के बाद लाहिड़ी ने कहा, ‘‘बेहद निराशाजनक! पहले दिन के बाद मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। पहले दौर सहित हर दिन मेरी शुरुआत अच्छी नहीं रही और बीच में भी मैंने कुछ अवसरों पर खराब खेल दिखाया। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल नहीं दिखाया। यह निराशाजनक है क्योंकि आपको यह मौका चार वर्षों में एक बार मिलता है और इस बार तो पांच साल में ऐसा हुआ। उम्मीद है कि तीन साल बाद मैं अच्छा प्रदर्शन करूंगा। आपको जो भी मौका मिले उसका फायदा उठाना चाहिए।’’
