
सारी दुनिया। 24 अगस्त को टोक्यो में पैरालम्पिक खेलों का शानदार आगाज़ हो गया। जापान के राजा नरिहितो ने खेलों के शुभारंभ की घोषणा की। मंगलवार को हुए उद्घाटन समारोह में 11 की बजाय 9 सदस्यीय भारतीय दल ने शिरकत की, जिनमें 6 अधिकारी और 3 खिलाड़ी शामिल थे। समारोह के लिए ऊंची कूद के खिलाड़ी और 2016 रियो पैरालम्पिक्स के स्वर्ण पदक विजेता मारियप्पन थंगावेलु (Mariyappan Thangavelu) को भारतीय दल का ध्वजवाहक मनोनीत किया गया था। उनके अलावा, discus thrower विनोद कुमार, javelin thrower टेकचंद तथा weight lifter जयदीप और सकीना खातून को उद्घाटन समारोह में शिरकत करनी थी। यानी, 6 अधिकारियों और 5 खिलाड़ियों को उद्घाटन समारोह में भाग लेना था, लेकिन अचानक भारतीय दल में फेरबदल करना पड़ा। भारतीय दल के ध्वजवाहक मारियप्पन थंगावेलु और विनोद कुमार (Vinod Kumar) को समारोह से दूरी बनानी पड़ी और थंगावेलु की जगह टेकचंद (Tek Chand) को भारतीय ध्वज के साथ दल की अगुवाई करने का गौरवमयी अवसर मिला।
असल में, मारियप्पन थंगावेलु और विनोद कुमार टोक्यो यात्रा के दौरान हवाई जहाज में covid positive व्यक्तियों के संपर्क में आ गए। इसलिए उन्हें जापान सरकार के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार गेम्स विलेज में क्वारंटाइन होना पड़ा। थंगावेलु और विनोद के लगातार हफ्तेभर से टेस्ट किए जा रहे थे और उनकी रिपोर्ट भी नेगेटिव आ रही थी। फिर भी, टोक्यो पैरालंपिक आयोजन समिति ने भारतीय अधिकारियों को एहतियात के तौर पर उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल न करने की सलाह दी। इसी के चलते थंगावेलु के स्थान पर टेकचंद को भारतीय दल का ध्वजवाहक बनाया गया। यह बात अलग है कि थंगावेलु और विनोद को अपने-अपने इवेंट में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई है।


आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ओलंपिक या पैरालम्पिक खेलों के उद्घाटन समारोह में एक देश से अधिकतम 6 अधिकारियों को ही शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसके विपरीत, खिलाड़ियों के लिए ऐसी कोई रोक नहीं थी। लेकिन, कोविड-19 प्रोटोकॉल के चलते बिना दर्शकों के हो रहे इन खेलों में केवल 7 भारतीय खिलाड़ी ही Tokyo पहुंच पाए थे। इनमें से टेबल टेनिस खिलाड़ियों, सोनल पटेल और भाविना पटेल को बुधवार के दिन प्रतिस्पर्धा में उतारना था। इस कारण उनका उद्घाटन समारोह में भाग लेने का कार्यक्रम नहीं था और शेष पांच athletes को ही इसमें शामिल होना था। बाद में, कोरोना संक्रमित सहयात्री के संपर्क में आने के कारण थंगावेलु और विनोद को भी समारोह से दूर होना पड़ा और केवल 3 खिलाड़ी ही इस अवसर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पाए।
भारतीय दल के ध्वजवाहक बने टेक चंद हरियाणा के रेवाड़ी जिले के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। 37 वर्षीय टेक चंद ने 2018 एशियन पैरा खेलों में पुरुषों के शॉट पुट में कांस्य पदक और 2018 विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में रजत पदक जीता था।
2005 में हुई एक दुर्घटना के दौरान टेक चंद को रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी, जिसके कारण उन्हें लकवा मार गया। एक दोस्त से पैरा गेम्स के बारे में सुनने के बाद उन्होंने 2015 में पैरा एथलीट के रूप में जेवलिन थ्रो और शॉट पुट का अभ्यास करना शुरू किया। हरियाणा के खेल एवं युवा कार्य विभाग में कोच के पद पर कार्यरत टेक चंद रिवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम में ट्रेनिंग करते हुए एक दिन में 200 से अधिक थ्रो करते रहे हैं।
दूसरी ओर, रियो ओलंपिक खेलों की ऊंची कूद स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले मारियप्पन थंगावेलु ने पैरालंपिक के लिए हुए ट्रायल (परीक्षण) में 1.86 मीटर की ऊंचाई लांघी थी। उनका यह प्रदर्शन रियो 2016 के बाद उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक था। असल में, थंगावेलु को 2017 में टखने में चोट लगी थी और इसे ठीक होने में काफी समय लग गया था। काफी समय से अपनी पुरानी लय हासिल करने की कोशिश में उन्होंने 1.86 मीटर ऊंचाई नापकर जता दिया कि वे स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि लय हासिल करने के बाद वे खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। टी42 ऊंची कूद स्पर्धा में भाग ले रहे थंगावेलु ने 2016 रियो पैरा-ओलिंपिक खेलों में 1.89 मीटर ऊंची छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता था। वे 2019 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की हाई जंप टी-63 स्पर्धा में कांस्य पदक जीत चुके हैं। जकार्ता में हुए 2018 एशियन पैरा खेलों के उद्घाटन समारोह के लिए भी वे भारत के ध्वजवाहक थे। तमिलनाडु के सलेम जिले के रहने वाले इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने टोक्यो रवाना होने से पूर्व कहा था कि उनका लक्ष्य 1.93 मीटर की छलांग लगाकर ओलंपिक खेलों में अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीतना है।