कदम कदम आगे बढ़ना हैसीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ना है। बाहर-भीतर कुरुक्षेत्र हैहर पल महाभारत लड़ना है। रोज़ नया धोखा मिलना हैरोज़ भरोसा भी करना है। नहीं लिखा जो कभी किसी नेहमको तो वह ख़त पढ़ना है। खुद के भीतर से ही खुद कोएक नया इंसान गढ़ना है।। – अविनाश सैनी# 9416233992
“देश मेरे आबाद रहो”
ऐ देश मेरे आबाद रहोरहती दुनिया तक शाद रहो,तुम फूलो फलो महको चहकोऔर हर दम ही आज़ाद रहोए देश मेरे आबाद रहोरहती दुनिया तक शाद रहो। की खूब तरक्की है तूनेदुनिया में ऊंचा नाम कियानित नई मंज़िलें की हासिलजो हो ना सके वह काम किया।दिए इतने हीरे इस जग कोजिनका कोई पारावार नहींना ऐसा क्षेत्र…
मेरे गांव की माटी
वह मेरे गांव की माटी, भुला दूं किस तरह आख़िर,वह बूढ़े बाप की लाठी, भुला दूं किस तरह आखिर। जहां पर माफ हो जाती थी, मेरी गलतियां सारी,वह मां, वह प्यारी सी दादी, भुला दूं किस तरह आखिर। अभी भी याद आएं गांव की गलियां वो कच्ची सी,वहां बिछड़े हुए साथी, भुला दूं किस तरह…
कला परिषद निदेशक की हठधर्मिता से हरियाणा सरकार की हुई किरकिरी
– निदेशक संजय भसीन ने किया 24 कलाकारों को ब्लैक लिस्ट। – उत्तर क्षेत्र व उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्रों को पत्र लिखकर इन्हें काम न देने की सिफारिश की। – मुख्यमंत्री का नाम लेकर किया उन्हीं कलाकारों को ब्लैक लिस्ट, जिन्हें खुद मुख्यमंत्री कर चुके हैं सम्मानित। – देश में ऐसा पहली बार हुआ है…
घर फूँक थियेटर फेस्टिवल : ठंड और बरसात के बावजूद दर्शकों में दिखा उत्साह, “मौत क्यूं रात भर आती नहीं” नाटक की हुई प्रस्तुति
– दिल्ली के ‘भव्य कल्चरल सोसाइटी’ के कलाकारों ने दिखाया नाटक।– कई नए प्रयोग किये गए नाटक में।– नाटक के 2 अंत दिखाए।– दिखाया कि आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं। रोहतक, 27 दिसंबर। ‘सप्तक रंगमंडल, पठानिया वर्ल्ड कैंपस, सोसर्ग और अभिनव टोली द्वारा आयोजित घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में इस बार प्रताप सहगल के नाटक…
सोचने की आजादी वैज्ञानिक मानसिकता है और वैज्ञानिक मानसिकता से ही आजादी की सोच पैदा होती है : गौहर रज़ा
– वैज्ञानिक मानसिकता और सामाजिक न्याय पर कार्यशाला आयोजित।– आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ कार्यशाला का आयोजन।– जीवन में वैज्ञानिक मानसिकता की ज़रूरत और इसके प्रभाव सहित विभिन्न पक्षों पर गौहर रज़ा व वेदप्रिय ने रखी बात। रोहतक, 25 दिसम्बर। “सोचने की आजादी वैज्ञानिक मानसिकता है और वैज्ञानिक मानसिकता से ही आजादी…
घर फूँक थियेटर फेस्टिवल में नाटक बीवियों का मदरसा का हुआ मंचन – नाटक ने धर्म और परंपराओं के नाम पर औरत को अपने आधीन रखने की पुरुषवादी सोच का नमूना किया पेश– दुनिया के प्रसिद्ध नाटककार मोलियार की रचना को उतारा मंच पर– तमाम बाधाओं के बावजूद इश्क चढ़ा परवान– हास्य और व्यंग्य के…
घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में हुआ नाटक ‘पतझड़ के बाद’
– नाटक ने परिवार से ठुकराए बुजुर्गों के दर्द को किया बयां– सप्तक रंगमंडल, पठानिया वर्ल्ड कैंपस और सोसर्ग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ मंचन– महिला उत्पीड़न को दर्शाया– विदेशों में जा बसे बच्चों के मां-बाप की पीड़ा को भी ढ़ी अभिव्यक्ति रोहतक, सारी दुनिया। कई बार ज़िंदगी के कड़वे अनुभव या हमारे भीतर का…
घरफूंक थियेटर फेस्टिवल : तांडव नाटक ने समझाई प्यार और रिश्तों की अहमियत
रोहतक, 13 नवम्बर। “प्यार का एहसास अगर किसी वनमानुष को तांडव जैसे कठिन नृत्य में पारंगत बना सकता है, तो प्यार की नाकामी उसे दुनियादारी से विरक्त भी कर सकती है। यही नहीं, सच्चे प्यार को खोने के दुःख के आगे दुनिया के तमाम ऐशोआराम गौण हो जाते हैं , जिसे पाने के लिए इंसान…
घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में हुआ नाटक चरणदास चोर का मंचन
– मशहूर रंगकर्मी हबीब तनवीर का लिखा हुआ है नाटक – एनएसडी ग्रेजुएट व फिल्म अभिनेता राजेश तिवारी ने किया निर्देशन – जान देकर चुकाई चरणदास ने सच बोलने की कीमत रोहतक, 2 नवम्बर। सप्तक रंगमंडल, सोसर्ग और पठानिया वर्ल्ड कैंपस के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में इस बार मशहूर रंगकर्मी हबीब…









